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Just In: महाराष्ट्र में जमीन टोकनीकरण के लिए आएगा भारत का पहला ब्लॉकचेन कानून

एब्स्ट्रैक्ट:महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जमीन के टोकनीकरण के लिए DELTA Act का मसौदा तैयार होने की जानकारी दी है। यह भारत का पहला ब्लॉकचेन आधारित भूमि कानून हो सकता है।

महाराष्ट्र सरकार जमीन और दूसरी अचल संपत्तियों के रिकॉर्ड और लेनदेन को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि राज्य में जमीन को ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए डिजिटल टोकन में बदलने के लिए एक कानून का मसौदा तैयार किया गया है। इसे महाराष्ट्र डिजिटाइजेशन एंड एक्सचेंज ऑफ लैंड टोकन एसेट एक्ट यानी DELTA Act नाम दिया गया है।

फडणवीस के अनुसार, प्रस्तावित कानून की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। सरकार का लक्ष्य इस कानून को अगले चार से पांच महीनों में सामने लाना है। यदि यह योजना लागू होती है, तो महाराष्ट्र जमीन के टोकनीकरण के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने वाला भारत का पहला राज्य बन सकता है। हालांकि, अभी यह कानून लागू नहीं हुआ है और किसी भी जमीन के टोकन जारी नहीं किए गए हैं।

क्या है जमीन का टोकनीकरण

टोकनीकरण का मतलब किसी वास्तविक संपत्ति या उसके कानूनी अधिकार को डिजिटल इकाइयों में बदलना है। इन डिजिटल इकाइयों को ब्लॉकचेन पर दर्ज किया जा सकता है। ब्लॉकचेन एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था है, जिसमें दर्ज जानकारी को बदलना या मिटाना आसान नहीं होता और हर लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।

जमीन के मामले में इसका उद्देश्य मौजूदा मालिकाना हक और संपत्ति के अधिकारों को डिजिटल रूप में दर्ज करना हो सकता है। इससे जमीन की जानकारी की जांच, स्वामित्व का सत्यापन और लेनदेन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। भविष्य में इसके जरिए किसी संपत्ति में छोटे हिस्से के स्वामित्व या संपत्ति को कर्ज के लिए इस्तेमाल करने की सुविधा भी विकसित की जा सकती है।

हालांकि, जमीन का टोकनीकरण केवल रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने जितना आसान नहीं है। भारत में जमीन के मालिकाना हक, नामांतरण, स्टांप शुल्क, पंजीकरण, किरायेदारी और बंधक से जुड़े नियम अलग-अलग कानूनों के तहत आते हैं। इसलिए डिजिटल टोकन को वास्तविक कानूनी अधिकार से जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

SEBI, NSE और BSE से ली जाएगी सलाह

मुख्यमंत्री ने कहा कि DELTA Act के मसौदे को तैयार करने में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, तकनीकी विशेषज्ञों, कानून के जानकारों और शिक्षाविदों की मदद ली जा रही है।

सरकार का मानना है कि इतनी बड़ी योजना के लिए केवल तकनीकी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी। इसके साथ स्पष्ट कानून, निवेशकों और संपत्ति मालिकों की सुरक्षा तथा नियामकीय भरोसा भी जरूरी है। यदि जमीन के डिजिटल टोकन को आगे चलकर खरीदा या बेचा जाना है, तो यह भी तय करना होगा कि उन्हें किस संस्था की निगरानी में रखा जाएगा और विवाद की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी।

फडणवीस ने यह भी कहा कि इस योजना को लागू करने के लिए केंद्र सरकार और विभिन्न वित्तीय संस्थानों के साथ तालमेल जरूरी होगा। जमीन राज्य का विषय है, लेकिन बैंकिंग, प्रतिभूति बाजार और बड़े वित्तीय लेनदेन से जुड़े नियम केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

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महाराष्ट्र की जमीन में बड़ी आर्थिक क्षमता

फडणवीस ने महाराष्ट्र की जमीन और अचल संपत्तियों में छिपी आर्थिक क्षमता का अनुमान करीब ₹50 लाख करोड़ बताया। सरकार का मानना है कि टोकनीकरण के जरिए ऐसी संपत्तियों का उपयोग बेहतर तरीके से किया जा सकता है, जिनका मूल्य तो बहुत अधिक है, लेकिन वे आसानी से बाजार में इस्तेमाल नहीं हो पातीं।

उदाहरण के लिए, किसी संपत्ति के मालिक के पास जमीन तो है, लेकिन उसे बेचने या उसके आधार पर कर्ज लेने में लंबी प्रक्रिया और दस्तावेजी अड़चनें आती हैं। डिजिटल रिकॉर्ड और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था से ऐसी प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है। इससे संपत्ति मालिकों को अपनी जमीन का वास्तविक मूल्य समझने और जरूरत पड़ने पर पूंजी जुटाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि टोकन किस ब्लॉकचेन नेटवर्क पर जारी होंगे, उनका स्वरूप क्या होगा और क्या उन्हें खुले बाजार में खरीदा-बेचा जा सकेगा।

कानून से पहले कई सवालों का जवाब जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन का टोकनीकरण तभी सफल हो सकता है, जब डिजिटल टोकन को वास्तविक और कानूनी रूप से मान्य संपत्ति अधिकार से जोड़ा जाए। केवल ब्लॉकचेन पर रिकॉर्ड दर्ज करने से जमीन का मालिकाना हक अपने आप नहीं बदल जाएगा।

सरकार को यह भी तय करना होगा कि अदालत के आदेश के बाद रिकॉर्ड में बदलाव कौन करेगा, गलत नामांतरण की जिम्मेदारी किसकी होगी, संपत्ति पर कर्ज होने की स्थिति में टोकन का क्या होगा और धोखाधड़ी से बचाने के लिए कौन से सुरक्षा उपाय अपनाए जाएंगे।

फडणवीस ने साफ किया है कि यह योजना क्रिप्टोकरेंसी में सट्टेबाजी बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जमीन और दूसरी संपत्तियों में बंद पूंजी को उपयोगी बनाने के लिए है। फिलहाल DELTA Act समीक्षा के दौर में है। इसकी वास्तविक दिशा तब स्पष्ट होगी, जब कानून का पूरा मसौदा सार्वजनिक होगा और पहली निगरानी वाली टोकन व्यवस्था शुरू की जाएगी।

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