पुणे में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक 25 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर महिला की पहचान बनाकर कानून की पढ़ाई कर रहे छात्र को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर ठग लिया। आरोपी ने करीब छह महीने तक महिला की आवाज में छात्र से बातचीत की और उसे अधिक मुनाफे का भरोसा दिलाकर 1,468 USDT अपने क्रिप्टो वॉलेट में ट्रांसफर करवा लिए। इस क्रिप्टोकरेंसी की कीमत लगभग ₹1.41 लाख बताई गई है।
पुणे साइबर पुलिस ने मामले में पार्वती इलाके के रहने वाले कुणाल जितेंद्र अडमाने को 31 अगस्त को गिरफ्तार किया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी ने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया है।
स्नैपचैट पर महिला बनकर बनाई पहचान
पुलिस के अनुसार, 23 वर्षीय कानून छात्र को 10 अक्टूबर 2025 को स्नैपचैट पर “प्रिंसिका जोशी” नाम के खाते से मित्रता का अनुरोध मिला था। खाते में एक महिला की तस्वीर लगी थी। आरोपी कथित तौर पर फोन पर महिला की आवाज में बात करता था, जिससे छात्र को विश्वास हो गया कि वह किसी महिला से बातचीत कर रहा है।
धीरे-धीरे दोनों के बीच नियमित बातचीत शुरू हो गई। आरोपी ने छात्र के साथ भरोसे का रिश्ता बनाया और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने की सलाह दी। उसने दावा किया कि सही तरीके से कारोबार करने पर छात्र को अच्छा मुनाफा मिल सकता है।
छात्र ने आरोपी की बातों पर भरोसा करते हुए क्रिप्टोकरेंसी कारोबार के लिए Binance पर खाता खोला। इसके बाद उसने एक ऑनलाइन एजेंट की मदद से USDT खरीदा। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने छात्र से कहा कि वह उसके लिए क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करेगा और बाद में मूल रकम के साथ मुनाफा भी लौटा देगा।
अलग-अलग वॉलेट से भेजी गई रकम
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, छात्र ने 9 जनवरी से 24 मार्च 2026 के बीच कई बार USDT ट्रांसफर किया। उसने अपने क्रिप्टो वॉलेट के अलावा एक रिश्तेदार और ऑनलाइन एजेंट के वॉलेट से भी रकम भेजी। कुल मिलाकर 1,468 USDT आरोपी के नियंत्रण वाले वॉलेट में पहुंचाए गए।
हालांकि, वादा किए गए मुनाफे की रकम छात्र को कभी नहीं मिली। जब उसने बार-बार पैसे और लाभ लौटाने की मांग की, तो उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उसे संदेह हुआ कि उसके साथ धोखा किया गया है।
मामला तब और स्पष्ट हुआ, जब छात्र ने 19 जुलाई 2026 को स्नैपचैट खाते की प्रोफाइल तस्वीर की जांच Google Lens के जरिए की। जांच में पता चला कि तस्वीर चंडीगढ़ की एक सोशल मीडिया प्रभावशाली महिला की थी। छात्र ने जब “प्रिंसिका” से इस बारे में सवाल किया, तो कुछ ही मिनटों में उससे जुड़े सोशल मीडिया खाते हटा दिए गए।
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तकनीकी जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस
ठगी का एहसास होने के बाद छात्र ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने 13 अगस्त को धोखाधड़ी और पहचान की चोरी से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया। इसके बाद जांच अधिकारियों ने स्नैपचैट खाते, मोबाइल नंबर और अन्य तकनीकी जानकारियों की जांच की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि “प्रिंसिका जोशी” नाम का कोई वास्तविक व्यक्ति इस खाते का इस्तेमाल नहीं कर रहा था। इसके पीछे कुणाल अडमाने था, जो होटल प्रबंधन के क्षेत्र से जुड़ा बताया गया है।
पुलिस ने डिजिटल सुरागों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया। अब उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया खातों और क्रिप्टो वॉलेट की जांच की जा रही है। अधिकारियों को शक है कि आरोपी ने इसी तरह भरोसा कायम कर दूसरे लोगों से भी पैसे या क्रिप्टोकरेंसी हासिल की हो सकती है।
ऑनलाइन निवेश में सावधानी की अपील
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के निवेश संबंधी दावों पर तुरंत भरोसा न करें। खासकर क्रिप्टोकरेंसी में अधिक और तय मुनाफे का वादा करने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।
पुलिस ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की पहचान केवल प्रोफाइल तस्वीर, नाम या फोन पर बातचीत के आधार पर तय नहीं की जानी चाहिए। निवेश से पहले संबंधित मंच, वॉलेट और व्यक्ति की विश्वसनीयता की जांच जरूरी है। साथ ही, किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर क्रिप्टोकरेंसी सीधे उसके निजी वॉलेट में भेजना जोखिम भरा हो सकता है।
यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब केवल तकनीकी तरीकों से ही नहीं, बल्कि भावनात्मक भरोसे और नकली पहचान के जरिए भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए ऑनलाइन दोस्ती, निवेश और डिजिटल भुगतान के मामलों में सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

