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Ethereum के नए स्टेकिंग प्रस्ताव पर बवाल, रिटर्न घटाने की योजना से समुदाय में विरोध

एब्स्ट्रैक्ट:Ethereum के नए EIP-8363 प्रस्ताव ने समुदाय में बड़ी बहस छेड़ दी है। प्रस्ताव के तहत स्टेकिंग रिटर्न में भारी कमी आ सकती है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे छोटे वैलिडेटर और DeFi क्षेत्र प्रभावित होंगे।

Ethereum समुदाय में इन दिनों एक नए प्रस्ताव को लेकर तीखी बहस चल रही है। EIP-8363 नाम के इस प्रस्ताव का उद्देश्य Ethereum नेटवर्क पर स्टेकिंग रिवॉर्ड की संरचना को बदलना है। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि इससे ETH की आपूर्ति पर नियंत्रण बेहतर होगा और लंबे समय में परिसंपत्ति का मूल्य मजबूत हो सकता है। वहीं आलोचकों का तर्क है कि इससे छोटे वैलिडेटर, स्टेकिंग करने वाले उपयोगकर्ता और विकेंद्रीकृत वित्त क्षेत्र को नुकसान पहुंच सकता है।

यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चर्चा के चरण में है और इसे किसी नेटवर्क अपग्रेड का हिस्सा नहीं बनाया गया है। फिर भी इसने Ethereum पारिस्थितिकी तंत्र में बड़ी बहस छेड़ दी है क्योंकि इसका असर नेटवर्क की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों पर पड़ सकता है।

EIP-8363 क्या है?

यह प्रस्ताव “टेपर्ड इश्यूअंस बर्न” नाम की व्यवस्था पेश करता है। इसके तहत जैसे-जैसे Ethereum पर स्टेक की गई ETH की मात्रा बढ़ेगी, वैलिडेटर को मिलने वाले नए ETH रिवॉर्ड का बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे जला दिया जाएगा।

प्रस्ताव के अनुसार यदि स्टेक की गई ETH की मात्रा लगभग 6.02 करोड़ ETH तक पहुंच जाती है, जो मौजूदा कुल आपूर्ति का लगभग 50 प्रतिशत है, तो सहमति स्तर के नए स्टेकिंग रिवॉर्ड प्रभावी रूप से शून्य तक पहुंच सकते हैं। यह बदलाव एक साथ लागू नहीं होगा, बल्कि लगभग 18 महीनों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की बात कही गई है।

इस प्रस्ताव के पीछे Ethereum Foundation के शोधकर्ता जस्टिन ड्रेक समेत कई शोधकर्ता और डेवलपर जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था लगातार अधिक स्टेकिंग को प्रोत्साहित करती है, जिससे भविष्य में बहुत बड़ी मात्रा में ETH लॉक हो सकती है।

समर्थक इसे क्यों जरूरी मान रहे हैं?

प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि वर्तमान मॉडल में स्टेकिंग प्रोत्साहन पूरी तरह समाप्त नहीं होता। उनका तर्क है कि इससे समय के साथ अधिक से अधिक ETH स्टेकिंग में चला जाता है, जिससे परिसंचरण में उपलब्ध ETH कम हो सकता है और नेटवर्क कुछ बड़े स्टेकिंग प्रदाताओं पर अधिक निर्भर हो सकता है।

उनके अनुसार EIP-8363 से ETH जारी होने की दर कम होगी और नए टोकनों की आपूर्ति पर नियंत्रण मिलेगा। Ethereum में पहले से मौजूद शुल्क जलाने की व्यवस्था के साथ मिलकर यह मॉडल ETH को अधिक दुर्लभ बना सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे लंबी अवधि में ETH की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

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समर्थकों का यह भी कहना है कि इससे उन उपयोगकर्ताओं पर पड़ने वाला दबाव कम होगा जो अपनी ETH को स्टेक नहीं करना चाहते लेकिन लगातार बढ़ती आपूर्ति से प्रभावित होते हैं।

विरोध क्यों हो रहा है?

इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा विरोध DeFi क्षेत्र, लिक्विड स्टेकिंग सेवाओं और छोटे वैलिडेटरों की ओर से आया है। आलोचकों का कहना है कि स्टेकिंग रिवॉर्ड में बड़ी कटौती का असर सबसे पहले स्वतंत्र और छोटे वैलिडेटरों पर पड़ेगा क्योंकि उनकी संचालन लागत अपेक्षाकृत अधिक होती है।

Aave के संस्थापक स्टानी कुलेचोव और ether.fi के प्रमुख माइक सिलागाड्ज़े समेत कई उद्योग नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे नेटवर्क अधिक विकेंद्रीकृत होने के बजाय बड़े स्टेकिंग प्रदाताओं के हाथों में और केंद्रित हो सकता है।

कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कम स्टेकिंग रिटर्न से DeFi प्लेटफॉर्म की गतिविधि प्रभावित हो सकती है क्योंकि कई उत्पाद स्टेकिंग आय पर आधारित हैं। यदि रिटर्न घटता है तो संस्थागत निवेशकों और सामान्य उपयोगकर्ताओं की रुचि भी कम हो सकती है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल EIP-8363 केवल एक मसौदा प्रस्ताव है। इसे अभी मंजूरी नहीं मिली है और न ही Ethereum के किसी आगामी अपग्रेड में शामिल किया गया है। आने वाले महीनों में डेवलपर, शोधकर्ता, स्टेकिंग प्रदाता और समुदाय के सदस्य इसके फायदे और नुकसान पर चर्चा जारी रखेंगे।

विश्लेषकों का कहना है कि यह बहस केवल स्टेकिंग रिवॉर्ड तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में Ethereum की भविष्य की आर्थिक नीति, नेटवर्क सुरक्षा और विकेंद्रीकरण का सवाल भी है। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो यह Ethereum की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक नीतिगत बहसों में से एक बन सकता है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि EIP-8363 ने Ethereum समुदाय को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक पक्ष इसे ETH की दीर्घकालिक मजबूती के लिए जरूरी मानता है, जबकि दूसरा इसे नेटवर्क की भागीदारी और विकेंद्रीकरण के लिए जोखिमपूर्ण कदम मान रहा है।

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